करवा चौथ स्पेशल: आखिर चांद को छलनी से क्यों देखती है महिलाएं
Updated : 2018-10-27 12:41:20

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करवा चौथ का त्योहार दीपावली से नौ दिन पहले मनाया जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास की चतुर्थी को आता है। इस बार करवा चौथ का व्रत (कल) यानी 27 अक्टूबर 2018 को है। इस बार करवा चौथ पर अत्यंत शुभ योग बन रहे हैं। पंडितों के अनुसार इस बार 11 साल बाद करवाचौथ पर राजयोग बन रहा है। 

इसके साथ ही सर्वार्थसिद्धि और अमृतसिद्धि योग भी बन रहे हैं। तीन एक साथ शुभ योगों के होने के कारण इस बार करवाचौथ की पूजा अत्यंत ही शुभ मुहूर्त में होगी। इससे पहले 2007 में करवाचौथ पर राजयोग बना था। 

शादीशुदा महिलाएं चांद को देखकर खोलती है अपना व्रत...
सुहागिन महिलाओं के लिए करवाचौथ का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। यह व्रत सुहागन स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। करवा चौथ व्रत के दौरान शादीशुदा महिलाएं चांद को देखकर अपना व्रत खोलती है। लेकिन क्या आप जानते है कि आखिर चांद को छलनी में क्यों देखा जाता है तो हम आपको बताते है। 

दरअसल, करवा चौथ के व्रत में छलनी का बेहद महत्व है। इस दिन पूजा की थाली में महिलाएं सभी सामानों के साथ-साथ छलनी भी रखती है। करवा चौथ की रात महिलाएं अपना व्रत पति को इसी छलनी में से देखकर पूरा करती हैं। शादी-शुदा महिलाएं इस छलनी में पहले दीपक रख चांद को देखती हैं और फिर अपने पति को निहारती हैं। इसके बाद पति उन्हें पानी पिलाकर व्रत पूरा करवाते हैं। लेकिन कभी सोचा है पति और चांद दोनों को छलनी से ही क्यों देखा जाता है। 

चांद और पति को छलनी से इसीलिए देखती हैं महिलाएं...
हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, चंद्रमा को भगवान ब्रह्मा का रूप माना जाता है और चांद को लंबी आयु का वरदान मिला हुआ है। चांद में सुंदरता, शीतलता, प्रेम, प्रसिद्धि और लंबी आयु जैसे गुण पाए जाते हैं। इसीलिए सभी महिलाएं चांद को देखकर ये कामना करती हैं कि ये सभी गुण उनके पति में आ जाएं।

छलनी को लेकर एक और पौराणिक कथा...
छलनी को लेकर एक और पौराणिक कथा के मुताबिक एक साहूकार के सात लडक़े और एक बेटी थे। बेटी ने अपने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था। रात के समय जब सभी भाई भोजन करने लगे तो उन्होंने अपनी बहन को भी खाने के लिए आंमत्रित किया। लेकिन बहन ने कहा, ‘भाई! अभी चांद नहीं निकला है, उसके निकलने पर अर्घ्‍य देकर भोजन करूंगी।’ 

बहन की इस बात को सुन भाइयों ने बहन को खाना खिलाने की योजना बनाई। भाइयों दूर कहीं एक दिया रखा और बहन के पास छलनी ले जाकर उसे प्रकाश दिखाते हुए कहा कि, बहन। चांद निकल आया है। अर्घ्‍य देकर भोजन कर लो। इस प्रकार छल से उसका व्रत भंग हुआ और पति बहुत बीमार हुआ। ऐसा छल किसी और शादीशुदा महिला के साथ ना हो इसीलिए छलनी में ही दिया रख चांद को देखने की प्रथा शुरू हुई।






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